उत्सव विशेष : एक धागा कलाई से सरहद तक

इतिहास के पन्नों से लेकर आज के आधुनिक भारत तक,राखी का यह सूत्र व्यक्तिगत संबंधों की सीमाओं को लांघकर पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने की ताकत रखता है। जब यह धागा सरहद पर तैनात देश के वीर जवानों की कलाई पर सजता है,तो यह केवल  एक बहन का प्यार नहीं रहता यह पूरे देश की दुआओं, कृतज्ञता और भरोसे का प्रतीक बन जाता है।

उत्सव विशेष : एक धागा कलाई से सरहद तक

उमा त्रिवेदी, कर्नाटक

राखी का सूती धागा कहने को तो एक साधारण सा बंधन है,पर इसके भीतर छिपी भावनाएं असीम और अनमोल हैं। श्रावण मास की पूर्णिमा को जब बहन अपने भाई की कलाई पर यह पावन सूत्र बांधती है, तो केवल एक रस्म पूरी नहीं होती, बल्कि दो हृदयों के बीच अटूट स्नेह,विश्वास और समर्पण का एक नया अध्याय शुरू होता है। यह धागा बचपन की मीठी खट्टी यादों,साथ बिताए पलों और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साया बनकर खड़े रहने के उस निश्छल वादे को हर साल तरोताजा कर देता है।


​लेकिन, क्या यह रेशमी डोर सिर्फ चार दीवारों और भाई-बहन के पारिवारिक दायरे तक ही सीमित है ? जब हम दृष्टि का दायरा बढ़ाते हैं,तो पाते हैं कि इस धागे का विस्तार बहुत व्यापक है। इतिहास के पन्नों से लेकर आज के आधुनिक भारत तक,राखी का यह सूत्र व्यक्तिगत संबंधों की सीमाओं को लांघकर पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने की ताकत रखता है। जब यह धागा सरहद पर तैनात देश के वीर जवानों की कलाई पर सजता है,तो यह केवल  एक बहन का प्यार नहीं रहता यह पूरे देश की दुआओं, कृतज्ञता और भरोसे का प्रतीक बन जाता है।  उन सैनिकों के लिए,जो अपनों से दूरकर्नाट हमारी सुरक्षा करते हैं, यह रक्षासूत्र यह अहसास कराता है कि सवा सौ करोड़ देशवासी उनका अपना परिवार हैं।


​जब एक धागा निस्वार्थ भाव,रक्षा की जिम्मेदारी और अपनापे का प्रतीक बनता है,तो वह सामाजिक सौहार्द की बुनियाद मजबूत करता है। विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और मान्यताओं वाले इस विशाल देश में राखी का पर्व जाति और धर्म की दीवारों को गिराकर भाईचारे का संदेश देता है।
​सच्ची रक्षा केवल अपनों की नहीं, बल्कि अपने विचारों, अपने समाज और अपने राष्ट्र की अस्मिता की भी होती है। जिस दिन हम इस धागे के मूल भाव को आत्मसात कर लेंगे जहाँ हर नागरिक दूसरे की सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान का संबल बनेगा उसी दिन राखी का यह छोटा सा धागा एक सशक्त और एकजुट राष्ट्र के निर्माण का सबसे बड़ा आधार बन जाएगा

उमा त्रिवेदी, कर्नाटक