शख्सियत
शख़्सियत : खेती की ज़मीन पर शहरियों का अतिक्रमण, ग्रामीण...
शहरीकरण के कारण ग्रामीण संस्कृति का विनाश हो रहा है। तीज त्योहारों की विरासत भुलाई...
शख्सियत : आधुनिकता की दौड़ में संजाबाई का पीछे छूट जाना...
आधुनिकता में हमारी सांस्कृतिक विरासत का तानाबाना कुछ इस तरह छिन्न- भिन्न हुआ कि...
शख्सियत : साहित्य में सत्ता और पुरस्कारों के बीच दूरी होना...
ज्ञानपीठ, साहित्य अकादमी, बुकर या नोबेल जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार लेखकों को राष्ट्रीय...
शख्सियत : बेरोजगारी के कारण सामाजिक एवं आर्थिक अपराधों...
आजादी के बाद से ही बेरोजगारी एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा रहा है, हालांकि समय के साथ इसके...
शख्सियत : सोशल मीडिया के कारण ग्रामीण और शहरी लेखकों के...
परिवेश में अंतर के कारण देहाती और शहरी लेखकों की रचनाओं में बहुत फर्क देखने को मिलता...
शख्सियत : पेपर लीक की समस्या राजनीति से कहीं ज्यादा देश...
आंदोलनों का श्रेय हमेशा ही संदिग्ध रहा है। किसी एक के साथ-साथ अनेक चलते हैं, तब...
शख्सियत : पेपर लीक मामलों की रोकथाम ज़रूरी
हिंदी भाषा के प्रचार प्रसार के लिए दीप्ति जी ने ’काव्यदीप हिंदी साहित्य संथान’ की...
शख्सियत : केवल शब्दों का संसार नहीं होती कविता
समकालीन विधाओं में भी स्त्री, दलित, आदिवासी और शोषित वर्गों की अस्मिता और अधिकारों...
शख्सियत : मोबाइल फोन में सिमटकर रह गई आज की दुनिया
डिजिटल दुनिया में जरूरत से ज्यादा रमे रहने पर लोगों में शारीरिक थकान, गर्दन में...
शख्सियत : लोकमंगल और लोक चेतना के तटों के बीच बहती है डॉ....
स्वभाव में सरल, व्यवहार में विमल, कर्म में कुशल, सृजन में सबल और संपादन में सफल—...
शख्सियत : उर्दू को सांप्रदायिक नजरिये से देखना तंग दिमागी...
हिंदी की बोलियों (खड़ी बोली) और फ़ारसी अरबी के मेल से उर्दू का जन्म हुआ और आरंभिक...
शख्सियत : युध्द के कारण बच्चों के अधिकार होते हैं तबाह
युध्द बड़े देशों या गुटों के बीच होते हैं, लेकिन इसकी कीमत उन मासूम बच्चों को चुकाना...
शख्सियत : सोशल मीडिया और गेमिंग की लत बच्चों के लिए ख़तरनाक
अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की सीखने की प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। जाने माने...
शख्सियत : मनुष्य होने का सलीका सिखाता है साहित्य
प्रकृति में समन्वय, संतुलन और लय प्राकृतिक रूप से विद्यमान है। इसलिए वहां जीवन की...
शख्सियत : कविताओं के जरिए डाॅक्टरों को बनाया जा रहा मानवीय...
प्राचीनकाल में वैद्य मरीजों की नब्ज देखते थे, जिसके व्दारा मरीज से उनका आंतरिक रिश्ता...