मुद्दे की बात : रतलाम में गंदगी के ढेर पर सज रहा "बीमारियों का बाजार" महामारी फैलने का अंदेशा

मुद्दे की बात यह है कि अगर समय रहते नगर प्रशासन ने इस अदूरदर्शी निर्णय को वापस नहीं लिया और सब्जी दुकानदारों के लिए किसी स्वच्छ व सुव्यवस्थित स्थान का चयन नहीं किया, तो शहर में किसी बड़ी महामारी के फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता।

मुद्दे की बात : रतलाम में गंदगी के ढेर पर सज रहा "बीमारियों का बाजार" महामारी फैलने का अंदेशा

ताजी सब्जियों के साथ बेची जा रही बेपनाह बीमारियां

⚫ सब्जी बेचने वाले भी दुर्गंध युक्त माहौल में बैठने को मजबूर

अमृत सागर की सुंदरता पर ग्रहण

⚫ नगर सरकार का अदूरदर्शी फरमान

हरमुद्दा
​रतलाम, 27 जुलाई। शहरवासियों को बेहतर सुविधाएं देने का दावा करने वाली नगर सरकार अब आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने पर आमादा नजर आ रही है। सुविधा के नाम पर नगर निगम ने जिस फैसले को ऐतिहासिक बताया था, वह आज शहर के लिए जी का जंजाल बन चुका है। शहर भर का कचरा और गंदगी जहां एकत्र होती है, ठीक वहीं नगर सरकार के आदेश पर सब्जी बाजार सजा दिया गया है। आलम यह है कि अमृत सागर तालाब के आसपास अब ताजी सब्जियों के साथ बीमारियां भी बेची जा रही हैं।

​ट्रेंचिंग ग्राउंड के सामने 'सब्जी मंडी', बोर्ड बना मज़ाक

​हैरानी की बात तो यह है कि इस सब्जी बाजार के ठीक सामने ट्रेंचिंग ग्राउंड बना दिया गया है, जहां गंदगी और मलबे के पहाड़ लगे हुए हैं। नगर निगम की नाकामी का आलम यह है कि मौके पर 'गंदगी फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी - आज्ञा से नगर निगम आयुक्त' का बोर्ड तो टंगा है, लेकिन यह बोर्ड केवल एक औपचारिकता और मजाक बनकर रह गया है।

ले जा रहा है केवल बीमारियां

​गंदगी से पनपने वाले मक्खी-मच्छर और कीटाणु सीधे सब्जियों पर बैठ रहे हैं। इतना ही नहीं, अमृत सागर तालाब से उठने वाली दुर्गंध और कीड़े सब्जियों के जरिए सीधे आमजन की रसोई तक पहुंच रहे हैं। शहरवासी सेहत सुधारने के लिए हरी सब्जियां खरीद रहे हैं, लेकिन नगर सरकार की इस 'दूरदृष्टि' की बदौलत वे केवल बीमारियां घर ले जा रहे हैं। ठंड और गर्मी में तो सहन हो चुका है मगर बारिश में तो समस्या ने विकराल रूप ले लिया है।

​करोड़ों का अमृत सागर हुआ बदरंग

​जिस अमृत सागर तालाब के सौंदर्यीकरण पर 'खास योजना' के तहत जनता की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए थे, आज वह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। तालाब के किनारे डंडों, तिरपाल और कपड़ों से बनी अस्त-व्यस्त दुकानें इसकी सुंदरता को पूरी तरह नष्ट कर रही हैं। नगर सरकार की यह 'चिंतनशील प्रवृत्ति' और अदूरदर्शिता दर्शाती है कि शहर के विकास के लिए कोई ठोस मास्टर प्लान नहीं है। 8 10 महीने में तो योजना मूर्ति ले सकती थी मगर ऐसा चिंतन नहीं है। बारिश में क्या हश्र होगा, यह भी उसे समय नहीं सोचा गया। 

फिर कर देंगे इन्हें विस्थापित

​सवाल यह भी है कि जब इस जगह पर फोरलेन मार्ग प्रस्तावित है। आगे चलकर इन व्यापारियों को फिर विस्थापित किया जाना है, तो बिना किसी योजना के इन्हें यहां क्यों बसाया गया? एक सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक सब्जी बाजार बनाकर देने में नगर सरकार पूरी तरह नाकारा साबित हुई है।

​बारिश ने बढ़ाई आफत, सुविधाओं के नाम पर 'शून्य'

मौजूदा बारिश के मौसम में स्थिति और भयानक हो गई है। कीचड़ और गड्ढे: सड़कों पर बने गड्ढों में भरा गंदा पानी और कीचड़ वाहनों की आवाजाही से सीधे सब्जियों पर उड़ रहा है।

​बुनियादी सुविधाओं का अकाल

सब्जी व्यापारियों को सिर्फ इस जगह धकेल दिया गया, लेकिन उनके लिए न तो पीने के साफ पानी की व्यवस्था है, न शौचालय और न ही बैठने का समुचित स्थान। ठंड और गर्मी में तो सहन कर लिया मगर अब 2 जून की रोटी कमाने की मजबूरी में व्यापारी सुबह से शाम तक इस दुर्गंधयुक्त और गंदगी भरे माहौल में बैठने को मजबूर हैं, जिससे उनका खुद का स्वास्थ्य भी गंभीर खतरे में है। इनकी सेहत से सरोकार रखने वाला कोई हमदर्द शहर में नहीं है। 

​'ट्रिपल इंजन' सरकार में सुविधाओं के नाम पर नौटंकी

​जनता का आरोप है कि 'ट्रिपल इंजन' सरकार का लाभ शहर को मिलने के बजाय केवल वादों और नौटंकी तक सीमित रह गया है। नगर सरकार अपनी नाकामियों और गलतियों का ठीकरा पार्षदों के सिर फोड़ने पर आमादा है। काम न करने वाले लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों का बचाव करना और जनप्रतिनिधियों की साख को ठेस पहुंचाना ही अब व्यवस्था का मुख्य ढर्रा बन गया है।

मुद्दे की बात

महामारी फैलने का अंदेशा

​मुद्दे की बात यह है कि अगर समय रहते नगर प्रशासन ने इस अदूरदर्शी निर्णय को वापस नहीं लिया और सब्जी दुकानदारों के लिए किसी स्वच्छ व सुव्यवस्थित स्थान का चयन नहीं किया, तो शहर में किसी बड़ी महामारी के फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता।