विचार सरोकार : सुंदर शिल्पकारी से परिपूर्ण होने के बावजूद बहुत अधिक अभिरुचि दर्शकों की इस मंदिर के प्रति नहीं
हम दक्षिण के कोणार्क मन्दिर के विशाल परकोटे और सुंदर आकर्षक मूर्तियों को देखकर भारतीय शिल्पियों की तपस्या के समक्ष नतमस्तक हो जाते हैं वैसी ही अनुभूति रतलाम शहर के कोई 4 किलोमीटर दूर स्थित मांगल्य धाम को देखकर होती है। अब प्रश्न है कि हमारे दिव्य देवस्थानों के प्रति जानकारी बढ़ाने में हमारे ही प्रयासों को तेज कौन करेगा?
⚫ त्रिभुवनेश भारद्वाज
रतलाम का मांगल्य धाम-दक्षिण भारत की उत्कृष्ट वास्तु कला और विशाल दैवीय परिसर के साथ सुंदर शिल्पकारी से परिपूर्ण होने के बावजूद बहुत अधिक अभिरुचि दर्शकों की इस मंदिर के प्रति नहीं होने के अनेक कारण है। इनमें एक है मन्दिर तक पहुंच के लिए आगगमन के साधनों का न होना है।

हम दक्षिण के कोणार्क मन्दिर के विशाल परकोटे और सुंदर आकर्षक मूर्तियों को देखकर भारतीय शिल्पियों की तपस्या के समक्ष नतमस्तक हो जाते हैं वैसी ही अनुभूति रतलाम शहर के कोई 4 किलोमीटर दूर स्थित मांगल्य धाम को देखकर होती है।
वैभव बढ़ती है धार्मिक विरासत भी
रतलाम की पहचान इसकी झन्नाट सेव, विश्वसनीय सोने और सूरत की तरह विकसित होते साड़ी बाजार के कारण तो है ही लेकिन रतलाम की धार्मिक विरासत भी इसका वैभव बढ़ाती है। रतलाम के श्री कालिकामाता मन्दिर को कम विकसित होने के बावजूद पर्याप्त सम्मान प्राप्त है।


यक्ष प्रश्न कौन करेगा प्रयास तेज
रतलाम में कभी हठ योगियों की तपःस्थलियाँ रही। चार चमत्कारी भैरव पीठें हैं। तो यहाँ के पुरातन श्री हनुमान मंदिरों की भी ख्याति दूर-दूर तक है। रतलाम में साहू बावड़ी के खड़े और बड़े हनुमान जी की ख्याति हनुमान भक्तों को देश के कोने कोने से खींच कर लाती है। प्राचीन श्री हनुमान मंदिरों में रानी जी के मंदिर वाले हनुमान जी के चमत्कारों को कौन नहीं जानता। वैसे ही निरंतर अनुष्ठान और अखण्ड भजन कीर्तन सेवा से आज मेहंदी कुई हनुमान जी पर मिन्नतें करने और दुःख दुविधाओं से मुक्ति पाने के लिए अर्जियां लगाने वालों का तांता लगा रहता है। ऊकाला माता जी की तांत्रिक महत्ता उज्जैन की माता हरसिद्धि के समकक्ष ही है। प्राचीन देवस्थानों का उचित रख-रखाव और उनकी दिव्यता को भव्य निर्माण से सुंदर बनाकर क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है। इससे बेरोजगारी तो दूर होगी ही बाजार में आय का प्रवाह भी बढ़ेगा। अब यक्ष प्रश्न है कि हमारे दिव्य देवस्थानों के प्रति जानकारी बढ़ाने में हमारे ही प्रयासों को तेज कौन करेगा?

⚫ त्रिभुवनेश भारद्वाज
Hemant Bhatt