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मानव! तू क्यों भूल गया है, मौन भी करता है संवाद धूप, हिम, तूफ़ान से लड़कर, पर्वत...
मानव! तू क्यों भूल गया है, मौन भी करता है संवाद धूप, हिम, तूफ़ान से लड़कर, पर्वत...
शरद पूर्णिमा का चांद साक्षी बन कर रहा चरण वंदन उतर गया इसलिए धरती के आंगन यमुना...