शख्सियत

शख़्सियत : स्थानीय परिवेश में होती हैं श्रेष्ठ कविता की जड़ें

शख़्सियत : स्थानीय परिवेश में होती हैं श्रेष्ठ कविता की...

जीवन से जुड़ा कवि लोक भाषा चुनता है और लोक भाषा परिवर्तनशील होती है, इसलिए इसमें...

शख़्सियत : ख़तरों का सामना करती रही है अभिव्यक्ति की आज़ादी

शख़्सियत : ख़तरों का सामना करती रही है अभिव्यक्ति की आज़ादी

आज हर वह रचनाकार, कलाकार जो सच को अपनी अन्तर्वस्तु बनाना चाहता है, उसे अनेक कठिनाइयों...

शख़्सियत : सोशल मीडिया के जरिए लुगदी साहित्य का हो रहा आदान-प्रदान

शख़्सियत : सोशल मीडिया के जरिए लुगदी साहित्य का हो रहा आदान-प्रदान

साहित्य पर बहुत बड़ी जिम्मेदारी है समय-समय पर समाज के कानों तक वह बात पहुंचाने की...

शख़्सियत : क़िताबों की दुनिया से अब बहुत दूर जा चुके लोग

शख़्सियत : क़िताबों की दुनिया से अब बहुत दूर जा चुके लोग

डिजिटल युग में लोग किताबों से दूर होते जा रहे हैं। भारत में भी जिस दिन नेट नहीं...

शख्सियत : पीढ़ियों तक जीवित और जीवंत रहती हैं सार्थक कविताएं

शख्सियत : पीढ़ियों तक जीवित और जीवंत रहती हैं सार्थक कविताएं

असल कविता वह है जिसे कवि जब लिखे तो उसका खून झलके, नसों का कंपन सुनाई दे, कराह और...

शख्सियत : रचना, सृजन और संघर्ष से बनी शख्सियत 

शख्सियत : रचना, सृजन और संघर्ष से बनी शख्सियत 

जीवन को देखने और रचने का उनका नजरिया कुछ अलग है। एक पत्रकारिता के शिक्षक के मन की...

शख्सियत : ’अब तक का इतिहास देश का झूठा बता बदलते जाओ’

शख्सियत : ’अब तक का इतिहास देश का झूठा बता बदलते जाओ’

नाज़िश का कहना था कि श्रेष्ठ कविता की एक पहचान यह है कि वह हमें एक से अधिक बार पढ़े...

शख्सियत : परिवेश से अछूता नहीं रह सकता लेखक का रचना संसार

शख्सियत : परिवेश से अछूता नहीं रह सकता लेखक का रचना संसार

कुल्लू हिमाचल प्रदेश में जन्मी मंजूषा जी राजनीति शास्त्र में एमए कर चुकी हैं। अनेक...

शख्सियत : मेरे संपादन में प्रकाशित ’अनुकृति’ के जरिए नए रचनाकारों को मिली पहचान

शख्सियत : मेरे संपादन में प्रकाशित ’अनुकृति’ के जरिए नए...

दर्शन शास्त्र, इतिहास और हिंदी में एमए कर चुकी डाॅ. जयश्री ने हिंदी स्नातकोत्तर...