भावपूर्ण श्रद्धांजलि : शहर की हस्तियों ने दिवंगत राष्ट्रीय कवि एवं चिंतक अजहर हाशमी की यादों के खोले पन्ने

भावपूर्ण श्रद्धांजलि : शहर की हस्तियों ने दिवंगत राष्ट्रीय कवि एवं चिंतक अजहर हाशमी की यादों के खोले पन्ने

महाविद्यालय विद्यार्थी परिवार के बैनर तले हुआ भावपूर्ण श्रद्धांजलि का आयोजन

⚫ शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में प्रोफेसर हाशमी की मनोभावना के अनुकूल हुआ आयोजन

⚫ भावांजलि के पश्चात ज्वार अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

⚫ पंछियों को खिलाई जाएगी ज्वार

हरमुद्दा
रतलाम, 16 जून। राष्ट्रीय कवि एवं चिंतक प्रोफेसर अजहर हाशमी की याद में भावपूर्ण श्रद्धांजलि का आयोजन किया गया। शहर की हस्तियों ने यादों के पन्ने खोले और उनके व्यक्तित्व को निरूपित करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। भावांजलि के पश्चात ज्वार चढ़ाकर सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। चढ़ाई हुई ज्वार पंछियों को खिलाई जाएगी।

महाविद्यालय विद्यार्थी परिवार के बैनर चले शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में भावपूर्ण श्रद्धांजलि का आयोजन किया गया। उनकी भावना और संस्कार के अनुरूप भावपूर्ण श्रद्धांजलि का आयोजन किया गया। जिन्हें दिल से चाहते थे, वह हस्तियां मौजूद रही।

समाज को समर्पित रहा उनका व्यक्तित्व और कृतित्व

विद्यार्थी परिवार के अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी ने श्रद्धांजलि सभा के प्रारम्भ में कहा कि प्रो. हाशमी का व्यक्तित्व और कृतित्व समाज को समर्पित रहा। यही हमारे जीवन को मार्गदर्शित करता रहेगा। जीवन वीणा के तारों को हर रोज नई धुन देता पर, मृत्यु महाकाली की लय से कुछ तार चटकते रहते हैं। प्रो. अज़हर हाशमी जी की इन्हीं काव्य पंक्तियों में जीवन का दर्शन और अंतिम सत्य समाहित है और इसी अंतिम सत्य की ओर बढ़ते हुए 10 जून को प्रो. हाशमी जी ने संसार से अंतिम विदाई ली।

सेवादार बापू ने दी भावांजलि

प्रो. हाशमी की अस्वस्थता में उनकी सेवा करने वाले उनके सेवादार बापू ने भी प्रो हाशमी जी के लिए अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति देते हुए उन्हें भावांजलि दी। भावपूर्ण श्रद्धांजलि के आयोजन में शहर की हस्तियों ने अपनी यादों के पन्ने खोलते हुए भावांजलि व्यक्त की। 

वे एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी

भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय भाव व्यक्त करते हुए

भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय ने  रतलाम भाजपा इकाई की ओर से प्रो. हाशमी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे एक विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। रतलाम को कर्म भूमि बनाकर रतलाम को धन्य किया। उनका व्यक्तिगत मार्गदर्शन और आशीर्वाद मुझे निरंतर प्राप्त होता रहा।

प्रो. हाशमी रहे एक उदारमना व्यक्तित्व 

प्रो. मनोहर जैन ने कहा कि प्रो. हाशमी जी का शिष्य तो नहीं रहा, लेकिन वक्तृत्व कला में उन्होंने निखारा। कदम दर कदम मार्गदर्शन प्राप्त कर स्वयं को भाग्यशाली महसूस करता हूं। उन्होंने न केवल गुरु के रूप में मार्गदर्शन किया, अपितु हमारे हित के लिए सदैव तत्पर रहते हुए पूर्ण सहयोग किया। प्रो. हाशमी जी एक उदारमना व्यक्तित्व रहे। 

विराट व्यक्तित्व में सभी धर्म समाहित
 
समाजसेवी प्रदीप जैन ने प्रो. हाशमी को नमन करते हुए कहा कि उनका इतना विराट व्यक्तित्व था, जिसमें सभी धर्म समाहित थे। वे ज्ञान का भंडार थे। उनके साहित्य, काव्य को जन-जन तक पहुंचाना ही उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

वेद, उपनिषद, कुरान, जैन धर्म पर साधिकार बोलते

समाजसेवी सुभाष जैन विचार व्यक्त करते हुए

समाजसेवी सुभाष जैन ने कहा कि वे न केवल वेद, उपनिषद, कुरान पर साधिकार बोलते थे, बल्कि उनका जैन धर्म पर भी गहन अध्ययन था। जैन समाज में वे जैन धर्म पर व्याख्यान के लिए निरंतर बुलाए जाते थे। 

स्पष्टवादी व्यक्तित्व था प्रोफेसर हाशमी का

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रदीप सिंह राव ने कहा कि प्रो. हाशमी जी एक निडर और स्पष्टवादी व्यक्ति थे, अपनी बात को साहस के साथ कहना जानते थे। 

उस शिखर पर विराजित रहे जिसे कोई नहीं छू सकता

प्रो. आरपी पाटीदार और प्रो. बड़गोत्या ने भी प्रो. हाशमी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि प्रो. हाशमी ज्ञान और साहित्य में उस शिखर पर विराजित हैं, जहां कोई नहीं पहुंच सकता।

विद्यार्थी बने बिना ही ज्ञान का मिला लाभ

शिक्षक सांस्कृतिक मंच की ओर से श्रद्धांजलि देते हुए दिनेश कुमार शर्मा ने भी प्रो. हाशमी जी के व्यक्तित्व के अनुकरणीय पक्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि जो उनके विद्यार्थी नहीं भी रहे, वे भी उनके ज्ञान से लाभान्वित होते रहे हैं और उनसे प्रेरणा लेते रहे हैं। कैप्टेन डॉ. एन के शाह ने प्रो .हाशमी को कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।

सभी शिष्यों को दी संस्कार की संपदा

विद्यार्थी परिवार की डॉ. प्रवीणा दवेसर भाव व्यक्त करते हुए

विद्यार्थी परिवार की डॉ. प्रवीणा दवेसर ने प्रो . हाशमी जी को श्लोक और मंत्र उच्चारित कर उनके प्रणम्य व्यक्तित्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रो. हाशमी जी ने सभी शिष्यों को संस्कार की संपदा दी है, जिसे अक्षुण्ण बनाए रखना हमारा कर्तव्य है।

हमेशा बढ़ाते रहे शिष्यों का आत्मविश्वास

पूर्व प्राचार्य डॉ. अनिला कंवर ने कहा कि प्रो. हाशमी जी एक आदर्श गुरु रहे। हर कदम पर वे शिष्यों के साथ खड़े रहे और उनका आत्म विश्वास बनाए रखा।

उनकी लोकप्रियता का कारण पारदर्शिता

चिंतक त्रिभुवनेश भारद्वाज विचार व्यक्त करते हुए

चिंतक त्रिभुवनेश भारद्वाज ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि प्रो. हाशमी जी की लोकप्रियता का कारण उनकी पारदर्शिता है। उन्होंने वही जीया जो लिखा। वैसे तो 27 नक्षत्र होते हैं मगर वे 28 वें नक्षत्र है।

साहित्य में की मौलिक स्थापनाएं

साहित्यकार आशीष दशोत्तर विचार व्यक्त करते हुए

साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि प्रो.हाशमी ने अपने साहित्य में मौलिक स्थापनाएं की। मौलिकता उनकी शैली थी। 

ज्वार चढ़ाकर दी श्रद्धांजलि

साहित्यकार प्रकाश हेमावत विचार व्यक्त करते हुए

साहित्यकार इंदु सिंहा विचार व्यक्त करते हुए

भावांजलि कार्यक्रम में साहित्यकार इंदु सिन्हा, पाठक मंच की संयोजिका रश्मि पंडित, पत्रकार हेमंत भट्ट, श्याम सुंदर भाटी, राष्ट्रीय राजपूत संगठन के नरेंद्र सिंह पंवार, लेखिका वैदेही कोठारी, समाजसेवी नवनीत मेहता, अनिल झालानी, डॉ. हितेश पाठक, अदिति दवेसर, पत्रकार ओम त्रिवेदी, कमलेश पाटीदार,  सतीश जोशी , प्रकाश हेमावत, हरिप्रसाद मेहता, सिंघम टाइम्स के गोविंद उपाध्याय, नंदिनी सक्सेना, वृत्तिका त्रिपाठी, प्रारब्ध त्रिपाठी , सुरेखा नागर, शलभ नागर, पायल नागर, आशा शर्मा, अंजना सक्सेना, राजेंद्र शर्मा, दिवंगत प्रोफेसर हाशमी के छोटे भाई मजहर हाशमी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जनों सहित मौजूद हस्तियों ने ज्वार अर्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा का प्रारम्भ महर्षि संजय शिवशंकर दवे ने शांति पाठ और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया। संचालन श्वेता नागर ने किया। आभार तुषार कोठारी ने माना।

फोटो : प्रकाश हेमावत