स्मृति शेष : ज्योतिष क्षेत्र के दैदीप्यमान नक्षत्र का अवसान

दिवंगत श्री ओझा रतलाम (मध्य प्रदेश) के प्रसिद्ध कर्मकांडी विद्वान पंडित स्वर्गीय बसंतीलाल जी भट्ट के प्रमुख शिष्यों में से एक माने जाते हैं। पंडित बसंतीलाल जी भट्ट को उनके शास्त्रोक्त ज्ञान और कर्मकांड की शुद्धता के लिए पहचाना जाता था और दुर्गा शंकर ओझा ने उन्हीं की देख-रेख में प्राचीन पद्धतियों का अध्ययन किया। 

स्मृति शेष : ज्योतिष क्षेत्र के दैदीप्यमान नक्षत्र का अवसान

प्रसिद्ध कर्मकांडी विद्वान पंडित बसंतीलाल जी भट्ट के प्रमुख शिष्यों में से एक थे ज्योतिषाचार्य ओझा

⚫ सतीश त्रिपाठी

वैदिक, पौराणिक, ज्योतिषी एवं कर्मकांडी पंडित बसंतीलाल जी भट्ट के शिष्य दुर्गा शंकर ओझा का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से धार्मिक अनुष्ठान, ज्योतिष और कर्मकांड की गुरु-शिष्य परंपरा तक केंद्रित रहा है।



​गुरु-शिष्य परंपरा

दिवंगत श्री ओझा रतलाम (मध्य प्रदेश) के प्रसिद्ध कर्मकांडी विद्वान पंडित स्वर्गीय बसंतीलाल जी भट्ट के प्रमुख शिष्यों में से एक माने जाते हैं। पंडित बसंतीलाल जी भट्ट को उनके शास्त्रोक्त ज्ञान और कर्मकांड की शुद्धता के लिए पहचाना जाता था, और दुर्गा शंकर ओझा ने उन्हीं की देख-रेख में प्राचीन पद्धतियों का अध्ययन किया। 

पारंपरिक ज्योतिषीय ज्ञान के लिए प्रसिद्ध

पंडित ओझा विशेष रूप से अपनी सटीक गणनाओं और पारंपरिक ज्योतिषीय ज्ञान के लिए पहचाने जाते हैं। पराशर ज्योतिष, भृगु संहिता और वैदिक ज्योतिष का गहरा ज्ञान है। वे कुंडलियों के विश्लेषण और भविष्यवाणियों के लिए प्रसिद्ध हैं।

शास्त्रोक्त विधि-विधान से पूजन संपन्न कराने में निपुण

पंडित ओझा को विशेष रूप से श्रीमद्भागवत कथा, शिव महापुराण और विभिन्न यज्ञ-अनुष्ठानों के संपादन के लिए जाना जाता है। वे शास्त्रीय विधि-विधान से पूजन संपन्न कराने में निपुण माने जाते हैं। ​इनका मुख्य कार्यक्षेत्र रतलाम, उज्जैन और मालवांचल के अन्य हिस्से रहे हैं। वे स्थानीय स्तर पर धार्मिक आयोजनों और ज्योतिषीय परामर्श के लिए भी समाज में सक्रिय रहते हैं। वे न केवल व्यक्तिगत परामर्श देते हैं, बल्कि तिथियों, त्योहारों और शुभ मुहूर्तों की गणना में भी उनकी विशेषज्ञता मानी जाती है। स्थानीय स्तर पर उन्हें पंचांग के विश्लेषण के लिए प्रमाण माना जाता है।

​धार्मिक योगदान

पंडित ओझा ने अपने गुरु पंडित बसंती लाल जी भट्ट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए, वे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और युवा पीढ़ी को कर्मकांड के प्रशिक्षण में भी योगदान देते रहे हैं। ​कर्मकांड वे विभिन्न प्रकार के दोष निवारण (जैसे कालसर्प दोष, मंगल दोष) और विशेष पूजा-अर्चना के विशेषज्ञ भी हैं।

भविष्यवाणियां

पंडित ओझा ने उन्होंने कई बार मौसम, राजनीति और सामाजिक बदलावों को लेकर भविष्यवाणियां की हैं, जो अक्सर चर्चा का विषय रहती हैं। वे विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और समाचार पत्रों के माध्यम से ज्योतिषीय सुझाव और राशिफल साझा करते रहे।

 युवा समाजसेवी थे

श्री सिखवाल समाज देवस्थान न्यास की स्थापना 27 मार्च 1975 को हुई थी l स्वर्गीय श्री दुर्गाशंकर ओझा इस न्यास में संस्थापक न्यासी बने थे  l  मात्र 27 वर्ष की आयु में उन्हें समाज में कार्य करने का अवसर मिला l उनके मार्गदर्शन में न्यास ने अनेक सामाजिक कार्य किए l पंडित ओझा समाज के हर व्यक्ति के ज्योतिषी कार्य के लिए सदैव उपलब्ध रहते थे श्री महर्षि श्रृंग विद्यापीठ की स्थापना पर 30 जून 2008 को उनका सम्मान भी न्यास मंडल द्वारा किया गया था।

सनातन धर्म सभा एवं महारुद्र की समिति द्वारा प्रतिवर्ष होने वाले त्रिवेणी मेले के महारुद्र यज्ञ के भी पंडित श्री दुर्गाशंकर ओझा विगत 35 - 40 वर्षों से प्रमुख यज्ञ आचार्य रहे हैं।

सतीश त्रिपाठी