सामाजिक सरोकार : शासकीय कन्या महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में हुई मां सरस्वती की मूर्ति स्थापना
⚫ वसंत राग में संगीतबद्ध गीत 'आया वसंत रे' की मोहक प्रस्तुति ने बांधा समां
⚫ वार्षिक पत्रिका ऋचा का हुआ विमोचन
⚫ विद्या और विद्यावान की पूजा सर्वत्र होती है पूजा : रंगकर्मी कैलाश व्यास
⚫ आज पूरा हुआ मां सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना का स्वप्न : डॉ. मंगलेश्वरी जोशी
हरमुद्दा
रतलाम, 23 जनवरी। शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में वसंत पंचमी पर महाविद्यालय परिवार द्वारा महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में मां सरस्वती की भव्य मूर्ति की स्थापना की गई।

कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों रंगकर्मी कैलाश व्यास, आचार्य सत्यव्रत शास्त्री, पूर्व अध्यापक वीके जैन द्वारा मां सरस्वती की मूर्ति का अनावरण किया।
मन्त्रोच्चार के साथ हुई प्रतिमा स्थापना
दीप प्रज्ज्वलन के साथ विशेष अतिथि आचार्य सत्यव्रत शास्त्री द्वारा वेदोक्त, शास्त्रोक्त मन्त्रोच्चार के साथ मां वीणापाणि की प्रतिमा की स्थापना कर पूजा की गई। संगीत विभाग की छात्राओं द्वारा मां शारदा की 'शारदे सरस्वती, जयति हंसवाहिनी, जयति वीणापाणि' सुरमई, सरस वंदना प्रस्तुत की। छात्राओं द्वारा प्रसिद्ध गीतकार मधुसूदन जोशी रचित व महाविद्यालय की संगीत विभाग की प्राध्यापक डॉ. स्नेहा पंडित द्वारा वसंत राग में संगीतबद्ध गीत 'आया वसंत रे' की मोहक प्रस्तुति ने समां बांध दिया।
पूर्व प्राध्यापक ने महाविद्यालय को भेंट की पुस्तकें
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता व महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक प्रो वीके जैन ने नेताजी की जयंती 'पराक्रम दिवस' के उपलक्ष्य में नेताजी के जीवन पर प्रकाश डाला व उनके व्यक्तित्व के अनसुने पहलुओं को प्रकाशित किया। साथ ही उन्होंने महाविद्यालय को कुछ पुस्तकें भी भेंट की।
विपरीत परिस्थितियों में भी जो आनंद में रहे वह सच्चा मानव
मुख्य वक्ता कैलाश व्यास ने कहा कि आज त्रिवेणी उत्सव मनाया जा रहा है जिसमें मां का प्राकट्य दिवस, नेताजी का जन्मदिवस व मां सरस्वती के वरद पुत्र सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्मदिन तीनों मनाएं जा रहे हैं। मां शारदा के हाथ में पुस्तक है, वीणा है, माला है, एक राजा की पूजा उसके राज्य में होती है किंतु विद्या की पूजा सर्वत्र होती है, पुस्तक के माध्यम से मां का यह संदेश हमारे मध्य व्याप्त है, मां के दूसरे हाथ मे माला है जो हमें एकाग्रता का संदेश देती है यदि व्यक्ति के भीतर आत्मीयता, सरसता होगी, तो वही वह दूसरों के समक्ष प्रकट करेगा। वसन्त का मौसम उल्लास का मौसम है, परंतु विपरीत परिस्थितियों में भी जो आनंद में रहे वह सच्चा मानव है।
मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापना का हुआ स्वप्न पूरा
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मंगलेश्वरी जोशी ने कहा कि मां वाग्देवी के आशीर्वाद से हम सब लाभान्वित हो। मां सरस्वती की मूर्ति की स्थापना का हमारा स्वप्न आज पूर्ण हुआ ये बहुत हर्षित होने का विषय है जो मां सरस्वती की अनुकंपा से ही हुआ है।
वार्षिक पत्रिका ऋचा का किया विमोचन
महाविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ऋचा का विमोचन उसके संपादक मंडल डॉ. स्वर्णलता ठन्ना नागर व छात्राओं हिमशिखा व कृति वारे के साथ अतिथियों द्वारा किया गया।
अतिथियों का किया शाल श्रीफल से सम्मान

अतिथियों का प्राचार्य डॉ. मंगलेश्वरी जोशी, डॉ. माणिक डांगे, डॉ. सुरेश चौहान, डॉ. वी एस बामनिया, डॉ. अनामिका सारस्वत द्वारा शॉल श्रीफल से स्वागत किया गया। महाविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक डॉ. अनिल जैन सहित समस्त प्राध्यापक व बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। संचालन संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. बी वर्षा ने किया। आभार अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अनामिका सारस्वत ने माना।
Hemant Bhatt