सुप्रीम कोर्ट का फैसला : शिक्षक पद पर रहना है तो उत्तीर्ण करना  होगी टीईटी की एग्जाम, पदोन्नति के लिए भी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट का फैसला : शिक्षक पद पर रहना है तो उत्तीर्ण करना  होगी टीईटी की एग्जाम, पदोन्नति के लिए भी जरूरी

टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट उत्तीर्ण नहीं होने पर छोड़नी होगी  टीचर्स की नौकरी

⚫ जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम समय उन्हें कुछ छूट

हरमुद्दा
नई दिल्ली, 2 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षण सेवा में बने रहने या पदोन्नति पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य है। शीर्ष कोर्ट ने टीईटी की अनिवार्यता से जुड़े कानून के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने संविधानिक संदर्भ के साथ अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य समेत कई दीवानी अपीलों में शिक्षक पात्रता के मुद्दों पर भी विचार किया। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने 29 जुलाई, 2011 से टीईटी अनिवार्य कर दी थी। 

अल्पसंख्यक संस्थानों में शिक्षकों के लिए उठाया था प्रश्न

मुख्य प्रश्न यह था कि ऐसे में क्या इससे पहले नियुक्त शिक्षकों को सेवा में बने रहने या पदोन्नति के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना जरूरी है? यह प्रश्न विशेष रूप से अल्पसंख्यक संस्थानों में शिक्षकों के लिए उठाया गया।

सेवानिवृत्ति लाभ के लिए अर्हता के ये नियम

सेवानिवृत्ति लाभ के मकसद से अर्हता हासिल करने के लिए ऐसे शिक्षकों को नियमानुसार अर्हक (क्वालीफाइंग) सेवा पूरी करनी होगी। यदि किसी शिक्षक ने अर्हक सेवा पूरी नहीं की या उसमें कोई कमी है, तो इस मामले पर संबंधित विभाग विचार कर सकता है। बता दें कि एनसीटीई ने 2010 में कक्षा 1 से 8 तक की शिक्षक नियुक्ति के लिए कुछ न्यूनतम योग्यताएं निर्धारित की थीं। इसके बाद एनसीटीई ने टीईटी की शुरुआत की थी।

पदोन्नति के लिए भी परीक्षा पास करना जरूरी

शीर्ष कोर्ट ने निर्देश जारी किया कि जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से कम शेष है, उन्हें टीईटी उत्तीर्ण किए बिना सेवा जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, प्रोन्नति के लिए उन्हें टीईटी उत्तीर्ण करना होगा। पीठ ने यह भी कहा कि अधिनियम लागू होने से पूर्व भर्ती सेवारत शिक्षक, जिनकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय बचा है, उन्हें दो वर्षों में टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। विफल रहने पर सेवा छोड़नी होगी या अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त होना होगा व सेवांत लाभ का भुगतान करना होगा।

तो उन्हें दी जाएगी अनिवार्य सेवा निवृत्ति

जहाँ तक शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले भर्ती हुए सेवारत शिक्षकों और सेवानिवृत्ति के बाद पाँच वर्ष से अधिक समय शेष रहने का संबंध है, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए उस तिथि से दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यदि ऐसे शिक्षकों में से कोई भी हमारे द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने में विफल रहता है, तो उन्हें सेवा छोड़नी होगी। उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जा सकता है। उन्हें वे सभी सेवांत लाभ दिए जाएँगे जिनके वे हकदार हैं।  हम एक शर्त जोड़ते हैं कि सेवांत लाभों के लिए अर्हता प्राप्त करने हेतु, ऐसे शिक्षकों को नियमों के अनुसार अर्हक सेवा अवधि पूरी करनी होगी। यदि किसी शिक्षक ने अर्हक सेवा पूरी नहीं की है और उसमें कोई कमी है, तो उसके मामले पर सरकार के उपयुक्त विभाग द्वारा उसके द्वारा अभ्यावेदन प्रस्तुत करने पर विचार किया जा सकता है।

उन्हें अपनी उम्मीदवारी पर विचार करने का अधिकार नहीं


हमने जो ऊपर कहा है, उसके अधीन रहते हुए, यह पुनः दोहराया जाता है कि नियुक्ति के इच्छुक और पदोन्नति द्वारा नियुक्ति के इच्छुक सेवारत शिक्षकों को, हालाँकि, टीईटी उत्तीर्ण करना आवश्यक है; अन्यथा, उन्हें अपनी उम्मीदवारी पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं होगा। आलोचना किए गए निर्णयों/आदेशों में उपरोक्त संशोधन के साथ, गैर-अल्पसंख्यक विद्यालयों के सेवारत शिक्षकों से संबंधित सभी अपीलें 87 उपरोक्त शर्तों पर निस्तारित की जाती हैं।