पुस्तक समीक्षा : अंतस की पीड़ा को अभिव्यक्त करती वैदेही की कहानियां

वैदेही की कहानियां हमारे घर-परिवार की कहानियां है। पीड़ाओं को भोगते व्यक्तियों की कहानियां है। या यूं कहें कि भौतिक चकाचौंध, आधुनिकता की दौड़ में, बिना विचारे मनमानी करती युवा पीढ़ी को केंद्र में रख लिखी कहानियां है।

पुस्तक समीक्षा : अंतस की पीड़ा को अभिव्यक्त करती वैदेही की कहानियां

संजय परसाई 'सरल'

कहानी की शुरुआत बचपन से ही हो जाती है, जैसा कि वैदेही कोठारी स्वयं कहती है कि नानी-दादी से सुनी बचपन की कहानियों से ही कहानी की शुरुआत हो जाती है। हमारे आसपास ही अनेक कहानियां बिखरी होती है बस जरूरत है उन्हें समेट कर शब्दों में बांधकर कहानी का रूप देने की और इन्हीं बिखरी कहानियों को समेटने का काम किया है वैदेही कोठारी ने।

कोरोना काल के विकट समय में परिस्थितियों से जूझते स्वयं एवं अन्य लोगों की पीड़ाओं को महसूस करती वैदेही के मन में एक कहानीकार ने जन्म लिया और उन्हीं पीड़ाओं को अपनी कलम के जरिए कागज पर कहानी का रूप दिया।

वैदेही की कहानियां हमारे घर-परिवार की कहानियां है। पीड़ाओं को भोगते व्यक्तियों की कहानियां है। या यूं कहें कि भौतिक चकाचौंध, आधुनिकता की दौड़ में, बिना विचारे मनमानी करती युवा पीढ़ी को केंद्र में रख लिखी कहानियां है। 'शर्मसार', 'डस्टबिन', 'दूर के ढोल सुहावने', कुछ ऐसी ही कहानियां है जो भ्रमित युवा पीढ़ी की मानसिकता उजागर करती है।

समाहित है 30 कहानियां

हाल ही में साहित्य अकादमी से प्रकाशित वैदेही कोठारी की पुस्तक 'गुनगुनी धूप सी कहानियां' में 30 कहानी समाहित है। अधिकांश कहानी कोरोना काल के दौर की कहानियां है। इसके साथ ही विभिन्न विषयों पर केंद्रित कहानी सोचने पर मजबूर करती है। वहीं अपने आसपास घटित घटनाओं के विषय मन को छूते हैं।

सोशल मीडिया की लत के चलते परिवारों के उजड़ने की पीड़ा को 'दिखावटी प्रेम', 'माँ तुम कितनी बदल गई', 'लव गेम', 'काफूर हुआ प्यार' आदि कहानियों में प्रमुखता से उजागर किया है। 'सबसे घातक कौन?' कहानी में कोरोना काल के दौरान एक बड़ा प्रश्न अंकित किया है कि भूख और कोरोना दोनों में बड़ा कौन?  'सावन की झड़ी मुसीबत की घड़ी' कहानी में निर्धन वर्ग की पीड़ा को उजागर करते हुए गंगा के परिवार के साथ घटित घटना का दोषी किसे माना जाए यह मूक प्रश्न छोड़ दिया गया है। 'हमारे साथ जो हुआ उसका दोषी कौन है? सरकार या हमारी गरीबी या फिर बारिश, भगवान तूने बारिश ऐसी निष्ठुर क्यों बनाई? हर साल हमारे जैसे लोग कुछ बह जाते हैं, कुछ बेघर हो जाते हैं, चुनाव के समय नेताजी आते हैं, पक्के घर बनाने का सपना दे जाते हैं।'

नया लेकर उपस्थित होती है वैदेही की कहानी

अतः वैदेही की कहानियां परत-दर-परत एक नया विषय लेकर उपस्थित होती है और पाठकों को सोचने पर विवश करती है कि क्या कहानी ऐसी भी लिखी जा सकती है? विषय ऐसे भी हो सकते हैं? एक छोटे से विषय को लेकर बड़ी बात कहने का हुनर वैदेही की कलम में दिखाई देता है।

 'सम्मान' नामक कहानी में महिला वर्ग के साथ होने वाले पक्षपात को उजागर किया गया है। महिलाओं के सुख-दुख, सम्मान आदि की परवाह न कर केवल पारिवारिक रिश्तों को अहमियत देने की प्रवृत्ति पर करारा व्यंग्य करते हुए यह दिखाने का प्रयास किया है की महिला वर्ग को ही अपनी खुशियों का गला घोंटकर हर मामले में समझौता करना पड़ता है। 

पाठकों को करती है प्रेरित

इस पुस्तक की सभी कहानियां श्रेष्ठ है लेकिन 'नंदनी' एक ऐसी कहानी है जो एक कहानी में कई कहानी के विषयों को लेकर उपस्थित होती है। जहां गाय की पीड़ा है, वहीं बछड़े के साथ अमानवीयता, साथ ही परिवार के आर्थिक संकट के चलते गाय का सौदा करना और फिर उस परिवार के प्रति उस गाय का लगाव और शहरी और ग्रामीण परिवेश के बीच का अंतर दर्शाती यह कहानी सर्वश्रेष्ठ कहानियों में कहीं जा सकती है। अतः वैदेही कोठारी की कहानियां, उनके विषय इतने रोचक हैं कि वह पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और कहानियों को बार-बार पढ़ने को प्रेरित भी करते हैं।

पुस्तक : गुनगुनी धूप सी कहानियां
कहानीकार : वैदेही कोठारी
प्रकाशक : साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश संस्कृत परिषद, संस्कृति विभाग, भोपाल (मप्र)
मूल्य :  145 ₹

संजय परसाई 'सरल'
118, शक्ति नगर, गली न.2 (महाकाल मंदिर के सामने)
रतलाम (मप्र) मोबाइल 982704 7920