हाल हकीकत : जनसुनवाई का बंटाढार, कलेक्टर ने बनाई आमजन से दूरी, कागज देना समस्याग्रस्त लोगों की मजबूरी

हाल हकीकत : जनसुनवाई का बंटाढार, कलेक्टर ने बनाई आमजन से दूरी, कागज देना समस्याग्रस्त लोगों की मजबूरी

जिला अधिकारियों को कोई मतलब नहीं, आकर बैठते हैं और चले जाते हैं बस

⚫ भेज दिया वहीं पर जहां से आए थे आवेदकों को

हरमुद्दा
रतलाम, 24 दिसंबर। कलेक्टर मिशा सिंह के आने के बाद जनसुनवाई की ट्रेन पटरी पर आई थी कि अब फिर से बेपटरी हो गई है। जनसुनवाई का बंटाधार होने लगा है। इसका एकमात्र कारण यही है कि कलेक्टर ने आमजन से दूरी बना ली है। समस्याग्रस्त लोगों की मजबूरी हो गई कि वे कागज देकर चले जाएं। 

कलेक्टर कार्यालय में हर मंगलवार को जिले भर के लोग वहां के अधिकारी की शिकायत लेकर आते कि वहां उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं, ताकि कलेक्टर के कहने पर भी काम करें लेकिन परेशानी तो यह है कि कलेक्टर को जिले के लोगों से मिलने की फुर्सत नहीं है।

... और उनकी नहीं रुचि

कलेक्टर ने उन अधिकारियों को जिम्मेदारी दे दी जो कि पहले से ही इसका निर्वहन करने में न तो रुचि रखते हैं और नहीं समस्या का समाधान करते हैं। जो जहां से आता है, उसे वहीं भेज दिया जाता है। 23 दिसंबर मंगलवार को भी यह कुछ देखने को मिला। 11 से 1 बजे तक जनसुनवाई के रजिस्टर में 58 आवेदन दर्ज हुए थे। और बाद में आंकड़ा बढ़कर 90 पहुंच गया। कुर्सी पर बिठाने की जगह आवेदक खड़े रहे। कुछ कुर्सी पर बैठे भी थे।

कोई घिस रहे थे नाखून से नाखून, तो कोई पूछ रहे थे कुशल क्षेम

वैसे भी जिला अधिकारियों को जनसुनवाई से कोई मतलब ना पहले था, ना अब है। वह आते हैं, बैठते हैं और चले जाते हैं। अधिकांश मोबाइल खेलते है। कोई पड़ोस वाला मोबाइल पर क्या कर रहा है उसे हाथ बांधकर देखते रहते हैं। कोई कुशल क्षेम पूछते है। कोई नाखून से नाखून घिसकर बाल झड़ने से बचने का जतन करते नजर आते हैं। कोई बतियाते रहते हैं। कुछ मुंह के अंदर खाते रहते हैं। बार-बार घड़ी देखते रहते हैं। कब 1 बजे और उठ कर चले जाएं। 

एक बानगी, क्या हुआ

डिप्टी कलेक्टर राधा महंत के पास बाजना क्षेत्र का कालू आया कहने लगा कि उसके काका जी ने जमीन से बेदखल कर दिया, उन्हें हिस्सा नहीं दिया। सब कुछ अपने नाम कर लिया। पटवारी मेडम ने मुझे अपमानित किया और जेल भेजने की धमकी दी। डिप्टी कलेक्टर ने कहा कि तू लायक नहीं होगा। इस कारण काका जी ने तेरे को जमीन नहीं दी और बेदखल कर दिया। आवेदन तहसीलदार बाजना की ओर प्रेषित कर दिया गया। कालू ने बताया कि मेहनत मजदूरी छोड़कर यहां पर इस उम्मीद में आया कि कुछ होगा मगर कागज ले लिए। कई रुपए खर्च हो गए वह फोकट में। कई लोग बाहर से आए थे और मन मसोस कर कागज देकर चलते बने।