साहित्य सरोकार : 'बरसाती नदियाँ' और 'सबको पीछे छोड़ चुका है आदमी' काव्य संग्रह हुए लोकार्पित

साहित्य सरोकार : 'बरसाती नदियाँ' और 'सबको पीछे छोड़ चुका है आदमी' काव्य संग्रह हुए लोकार्पित

रतलाम के कवि संजय सिंह राठौर और विक्रांत भट्ट की पुस्तकों का हुआ विमोचन

⚫ दोनों पुस्तकों को मिला पुरस्कार स्वरूप अनुदान

हरमुद्दा
भोपाल, 16 जुलाई। आईसेक्ट पब्लिकेशन, वनमाली सृजन पीठ, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में युवा कवि संजय सिंह राठौर के कविता संग्रह 'बरसाती नदियाँ' और युवा रंगकर्मी विक्रांत भट्ट के कविता संग्रह 'सबको पीछे छोड़ चुका है आदमी' का लोकार्पण मंगलवार को टैगोर विश्वविद्यालय के कथा सभागार में समारोह पूर्वक किया गया।

उल्लेखनीय है कि लोकार्पित दोनों पुस्तकें साहित्य अकादमी, संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन भोपाल द्वारा प्रकाशनार्थ श्रेष्ठ पाण्डुलिपियों में स्वीकृत हुई है। साहित्य अकादमी द्वारा दोनों पुस्तकों के प्रकाशन हेतु पुरस्कार स्वरूप अनुदान भी प्रदान किया गया है।

विक्रांत की कविताओं में नाटकीयता के बिंब

विमोचन समारोह को संबंध करते हुए श्री चौबे

इस अवसर पर वरिष्ठ कवि– कथाकार, निदेशक विश्व रंग एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए कहा कि संजय की कविताओं में मजदूर वर्ग की चिंता, उनके संघर्ष, परिवार माता-पिता पास पड़ोस अपने परिवेश के प्रति प्रेम परिलक्षित होता है, वही बाजारवाद के विरुद्ध भी उनकी कविताओं में जोर-शोर से बात होती है। विक्रांत की कविताओं में नाटकीयता के बिंब होते हैं।

संजय की कविताओं में प्रतिको का बखूबी प्रयोग

साहित्य अकादमी के निदेशक डॉक्टर दवे विचार व्यक्त करते हुए

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश शासन के निदेशक  डॉ. विकास दवे ने कहा कि संजय की कविताओं में प्रतिको का बखूबी प्रयोग हुआ है, जिसके माध्यम से वह अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति करते हैं, उन्होंने उनकी कविता टांड और बोनसाई का जिक्र करते हुए यह बात कही। उन्होंने उनकी कविता किराएदार को भी रेखांकित किया। वही विक्रांत की कविता में चांद कई तरह से कई प्रतिकों के रूप में आया है।

दोनों कवियों की रचनाओं में दुख और करुणा केंद्र में

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कथाकार एवं वनमाली सृजन पीठ, भोपाल के अध्यक्ष मुकेश वर्मा ने कहा कि दोनों कवियों की रचनाओं में दुख और करुणा केंद्र में है, लेकिन दुख और करुणा के साथ दोनों का ट्रीटमेंट अलग-अलग है।  दोनों ही कवि अंतर्मुखी है और लगातार अपने आप से संवाद करते हैं, जो पाठ को तक सीधे संप्रेषित होता है।

कविताओं पर की टिप्पणी

वरिष्ठ कला समीक्षक एवं 'रंग संवाद के संपादक विनय उपाध्याय विक्रांत की कविताओं पर टिप्पणी की वहीं युवा कवि मुदित श्रीवास्तव ने संजय सिंह राठौर की कविताओं को रेखांकित करते हुए अपनी बात विस्तार से रखी।

दोनों कवियों ने किया अपनी अपनी कविताओं का पाठ

 श्री राठौर काव्य पाठ करते हुए

श्री भट्ट काव्य पाठ करते हुए

कवि संजय सिंह राठौर ने अपनी कविताओं बोनसाई, अपना शहर, मां और किताब आदि का पाठ किया। विक्रांत भट्ट ने अपनी कविताओं  लिक्विड प्रेम, अब प्लूटो के बारे में नहीं पढ़ाया जाता, पहले से कहीं ज्यादा आगे आदि का पाठ किया। कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य आईसेक्ट पब्लिकेशन की प्रबंधक एवं वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक सुश्री ज्योति रघुवंशी द्वारा दिया गया। आईसेक्ट पब्लिकेशन के वरिष्ठ प्रबंधक महीप निगम ने आभार व्यक्त किया।

यह थे मौजूद

इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय  के कुल गुरु डॉ आर.पी. दुबे ,कुल सचिव डॉ. संगीता जौहरी, टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक, डॉ. जवाहर कर्नावट, मानविकी एवं उदार कला संकाय की डीन डॉ. रुचि मिश्रा तिवारी, विभागाध्यक्ष डॉ. हर्षा शर्मा, विभागाध्यक्ष (हिंदी), डॉ. अरुण पांडेय, संस्कृत, प्राच्य भाषा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के संयोजक डॉ. संजय दुबे, डॉ. सावित्री सिंह परिहार आदि उपस्थित थे।