मुद्दे की बात : रतलाम में जलप्रदाय की बदहाल स्थिति, सुधार और जवाबदेही हो सुनिश्चित

पेयजल के मुद्दे को लेकर रतलाम के रहवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। क्या जनता को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए चक्का जाम या प्रदर्शन जैसे कदम उठाने पड़ेंगे?

मुद्दे की बात : रतलाम में जलप्रदाय की बदहाल स्थिति, सुधार और जवाबदेही हो सुनिश्चित

बृजेश त्रिवेदी
रतलाम, 16 जून। पेयजल के मुद्दे को लेकर रतलाम के रहवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। बार-बार की शिकायतों, ट्वीट्स, और खबरों के बावजूद स्थिति में सुधार न होना निराशाजनक है। क्या जनता को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए चक्का जाम या प्रदर्शन जैसे कदम उठाने पड़ेंगे? यह शर्मनाक है कि एक आवश्यक सुविधा के लिए इतना संघर्ष करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश प्रशासन और रतलाम नगर निगम से यह अपील है कि इस मामले को गंभीरता से लें, जल प्रभारी की जवाबदेही सुनिश्चित करें, ताकि रतलाम की जनता को नियमित और स्वच्छ जलप्रदाय मिल सके।


रतलामशहर, विशेष रूप से दीनदयाल नगर, सेक्टर A, के निवासी लंबे समय से जलप्रदाय की अनियमितता से त्रस्त हैं। 16 जून 2025 को भी इस क्षेत्र में जलप्रदाय नहीं हुआ, जबकि पास के टाटानगर में निर्धारित समय पर पानी की आपूर्ति हुई। यह भेदभावपूर्ण व्यवहार निवासियों के लिए न केवल आश्चर्यजनक है, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर भारी असर डाल रहा है।

विलंब पर वसूली

निवासी हर महीने 175 रुपए जलकर के रूप में चुकाते हैं, लेकिन बदले में केवल 9 से 10दिन ही पानी मिलता है, वह भी दो दिन में एक बार। कई बार जलप्रदाय पूरी तरह बंद रहता है, जैसा कि 16 जून को देखा गया। इसके बावजूद, यदि भुगतान में मामूली देरी हो, तो नगर निगम 50 रुपए प्रति 15 दिन का विलंब शुल्क वसूलता है। 

स्वास्थ्य के लिए खतरा गंदा पानी

इससे भी बदतर, जलप्रदाय बाधित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था, जैसे टैंकर, का कोई प्रबंध नहीं किया जाता। जल वितरण में संतुलन की कमी साफ दिखती है। एक क्षेत्र को 30 मिनट पानी मिलता है, तो दूसरे क्षेत्र में भी समान समय मिलना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता। गंदा पानी आने की शिकायतें भी आम हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है।

ठोस समाधान की बजाय मिलते केवल आश्वासन

निवासियों ने इस समस्या को बार-बार स्थानीय पार्षद, नगर निगम और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया, लेकिन ठोस समाधान के बजाय केवल आश्वासन मिले। वर्षों से यही स्थिति बनी हुई है। नगर निगम की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ। यह स्पष्ट है कि जल प्रभारी और संबंधित अधिकारी इस व्यवस्था को सुचारू रूप से संभालने में असमर्थ हैं। मध्य प्रदेश में जल संकट की व्यापक समस्या, जैसे भूजल का अत्यधिक दोहन और पुरानी पाइप लाइनों की स्थिति, इस समस्या को और गंभीर बनाती है। जल शक्ति मंत्रालय की चेतावनी के अनुसार, मध्य प्रदेश "डे ज़ीरो" की ओर बढ़ रहा है, और रतलाम भी इस संकट से अछूता नहीं है।

⚫ रहवासियों का कहना है इसलिए, हम मध्य प्रदेश प्रशासन और रतलाम नगर निगम से मांग करते हैं कि यदि वर्तमान जल प्रभारी इस व्यवस्था को सुधारने में असमर्थ हैं, तो उनकी जगह किसी योग्य और जवाबदेह व्यक्ति को नियुक्त किया जाए। नया प्रभारी जल वितरण को नियमित, पारदर्शी और समान बनाने के लिए ठोस कदम उठाए। रहवासियों की अपेक्षाएँ स्पष्ट हैं। 

नियमित और स्वच्छ जलप्रदाय : हर क्षेत्र में समान समय और गुणवत्ता के साथ पानी की आपूर्ति।

पारदर्शिता: जल वितरण शेड्यूल और रखरखाव कार्यों की अग्रिम सूचना।

वैकल्पिक व्यवस्था: बाधित क्षेत्रों में टैंकरों की तत्काल व्यवस्था।

बुनियादी ढांचे में सुधार: पुरानी पाइपलाइनों का नवीनीकरण और जल गुणवत्ता की नियमित जाँच।

जवाबदेही: विलंब शुल्क जैसे अनुचित नियमों की समीक्षा और शिकायतों का त्वरित निपटारा।

⚫ निवासियों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। बार-बार की शिकायतों, ट्वीट्स, और खबरों के बावजूद स्थिति में सुधार न होना निराशाजनक है। क्या जनता को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए चक्का जाम या प्रदर्शन जैसे कदम उठाने पड़ेंगे? यह शर्मनाक है कि एक अति आवश्यक सुविधा के लिए इतना संघर्ष करना पड़ रहा है। 

ताकि हो सके नियमित और स्वच्छ जलप्रदाय

मध्य प्रदेश प्रशासन और रतलाम नगर निगम से हमारी अपील है कि इस मामले को गंभीरता से लें, जल प्रभारी की जवाबदेही सुनिश्चित करें। ताकि रतलाम की जनता को नियमित और स्वच्छ जलप्रदाय हो सके।