ऐसा भी होता है : थोड़ी थोड़ी सी लिफ्ट से 12 ज्योतिर्लिंग और 44 शक्तिपीठों की यात्रा की राजेंद्र शर्मा ने
यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए राजेंद्र भावुक हो गए और उन्होंने कहा, "मैं अपनी इस पूरी यात्रा की सफलता को बाबा महाकाल के चरणों में समर्पित करता हूँ। यह यात्रा सनातन आस्था, श्रद्धा और अटूट विश्वास की एक परीक्षा थी, जिसमें महादेव की कृपा से मुझे सफलता मिली।"
⚫ केवल 62 दिन में हुई 13757 किलोमीटर की यात्रा
⚫ जब पहुंच गए श्री महाकालेश्वर उज्जैन, तब पता चला पिता को यात्रा के बारे में
हरमुद्दा
रतलाम, 15 जून। "तू है सब कुछ जानने वाला, मैं हूँ तेरा मानने वाला, थोड़ी सी तू लिफ्ट करा दे" यह भाव थे राजेंद्र शर्मा के। फिर क्या था? महादेव ने राजेंद्र के संकल्प को सिद्ध करते हुए केवल 62 दिनों में 13757 किलोमीटर की यात्रा लिफ्ट के माध्यम से संपन्न करवाई। महादेव ने 12 ज्योतिर्लिंग, 44 शक्तिपीठ के दर्शन करवाएं। यहां तक की नेपाल के पशुपतिनाथ तक की भी यात्रा हो गई। खास बात यह रही की जेब का ₹1 भी खर्च नहीं हुआ। जन सहयोग मिलता रहा और खाना, खर्चा, रहना, होता रहा।

शहर के उकाला रोड स्थित सूरजमल जैन नगर निवासी 36 वर्षीय श्री शर्मा (पिता बालकृष्ण शर्मा) अपनी 62 दिनों की अत्यंत कठिन और अलौकिक धार्मिक यात्रा पूर्ण कर 10 जून को रतलाम लौटे। सोमवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए राजेंद्र शर्मा ने बताया कि इसके पहले बिना कुछ राशि खर्च किए नर्मदा की सात कोस (21किलोमीटर) की परिक्रमा नवरात्रि में ही पूर्ण हुई है। 36 वर्षीय श्री शर्मा ने बीसीए किया है। आई टी से जुड़े हैं।

जीवन संगिनी और माता-पिता के साथ राजेंद्र
पत्रकारों से चर्चा के दौरान जीवन संगिनी बिंदिया शर्मा, पिता बालकृष्ण एवं माता मंजू शर्मा भी मौजूद थे। चर्चा के दौरान पिता ने बताया कि मुझे तो पता ही नहीं था कि राजेंद्र कहां है? जब श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंच गया, तब राजेंद्र के संकल्प का पता चला।
देती रही पत्नी हौसला यात्रा पूरी करने का
जीवन संगिनी बिंदिया शर्मा ने बताया कि फोन पर सुबह शाम चर्चा होती रहती थी। कभी खुशी कभी गम की बातें हुई, मगर इन्हें हमेशा हौसला देती रही कि यात्रा पूरी करके ही आए। मम्मी पापा घर बच्चों की चिंता ना करें संकल्प को पूरा करके आएं। श्री शर्मा ने बताया कि आगामी योजना में जीवन संगिनी को इसी दिव्या यात्रा करवाऊंगा। उसके पश्चात माता-पिता को भी।
यात्रा शुरू हुई 10 अप्रैल को
श्री शर्मा ने बताया कि 10 अप्रैल को घर से निकला। लिफ्ट लेते-लेते श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंचा, वहां पर भक्तों ने चाय नाश्ता करवाया। दर्शन हुए और तत्पश्चात ओंकारेश्वर की ओर रवाना हुआ। हर दिन पैदल यात्रा में तकरीबन 20-25 किलोमीटर चला, वहीं लिफ्ट के माध्यम से हर दिन औसत रूप से 400 किलोमीटर की यात्रा हुई। 62 दिनों में 12 ज्योतिर्लिंग और 44 शक्तिपीठ के दर्शन हुए यहां तक की नेपाल में पशुपतिनाथ के भी दर्शन का लाभ मिला। देश का चाहे कोई भी राज्य हो, सभी ने भरपूर सहयोग किया। पश्चिम बंगाल में विकट परिस्थिति में अमन और दानिश का साथ मिला, उस समय ऐसा लग रहा था मानो साक्षात प्रभु नहीं सहयोगी भेजे हैं।
बाबा महाकाल को समर्पित की यात्रा
यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए राजेंद्र भावुक हो गए और उन्होंने कहा, "मैं अपनी इस पूरी यात्रा की सफलता को बाबा महाकाल के चरणों में समर्पित करता हूँ। यह यात्रा सनातन आस्था, श्रद्धा और अटूट विश्वास की एक परीक्षा थी, जिसमें महादेव की कृपा से मुझे सफलता मिली।" भरोसा और विश्वास के बल पर कम से कदम आगे पढ़ने गए और यात्रा पूर्ण होती गई।
यात्रा पर एक नजर
⚫ 13,757 किलोमीटर,
⚫ 62 दिन (10 अप्रैल से 10 जून 2026),
⚫ भारत के 18 राज्य तथा 2 देश (भारत और नेपाल),
⚫ धार्मिक स्थल: 44 शक्तिपीठ,
⚫12 ज्योतिर्लिंग, 4 बड़े धाम (द्वारका, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी, बद्रीनाथ) और उत्तराखंड के 4 छोटे धाम की संपूर्ण यात्रा पूरी की है।
Hemant Bhatt