धर्म संस्कृति : उज्जैन पंचांग का कहना मकर संक्रांति उत्सव 15 जनवरी को मनाना
⚫ व्यापारिक गतिविधियों में रहेगी भारी उथल-पुथल
⚫ रासायनिक आयुध होगा अत्यधिक प्रयोग
⚫ फंसलें होगी प्रभावित
हरमुद्दा
रतलाम, 11 जनवरी। उज्जैन पंचांग का कहना है कि मकर संक्रांति उत्सव 15 जनवरी को ही ही मनाना शास्त्र और धर्म सम्मत है। इस बार मकर संक्रांति बाघ पर विराजित होकर आ रही है। इसके चलते देश-विदेश में रासायनिक आयुध का अत्यधिक उपयोग होगा। व्यापारिक गतिविधियों में भारी उथल-पुथल रहेगी। शीत वृष्टि और ओलावृष्टि के चलते फंसलें प्रभावित होगी।

ज्योतिर्विद पंडित दुर्गाशंकर ओझा ने हरमुद्दा से चर्चा में बताया कि उज्जैन महाकाल पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 8 बजे बाद होगा। इसलिए
मकर संक्रांति उत्सव 15 जनवरी को मनाया जाएगा। पुण्य काल 15 जनवरी को ही माना जाएगा। दान पुण्य का सिलसिला इसी दिन रहेगा।
सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा होगी शुरू
सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा यानी उत्तरायण की शुरुआत होती है, जिसे हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन लोग पवित्र स्नान करते हैं। दान-पुण्य करते हैं और सूर्य देव की पूजा करते हैं। यह पर्व शुद्धता, नई ऊर्जा, खुशी और सर्दियों के अंत का प्रतीक भी माना जाता है।
बाघ पर सवार है मकर संक्रांति हाथ में है चांदी का पात्र
मकर संक्रांति इस बार बाघ पर सवार होकर आ रही है। उपवाहन अश्व है। मकर संक्रांति पीला वस्त्र धारण कर आ रही है। हाथ में चांदी का पात्र है।
रासायनिक आयुध का होगा अत्यधिक उपयोग
मकर संक्रांति के फल के मद्दे नजर बार-बार संकट पूर्ण स्थिति उत्पन्न होगी। देश विदेश में रासायनिक आयुध का अत्यधिक उपयोग होगा। इसके चलते जहां वर्ग संघर्ष की संभावना बनी रहेगी, वहीं व्यापार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलेंगे। प्राकृतिक आपदा भी संभव है। शीत वृष्टि और ओलावृष्टि के चलते फंसलें प्रभावित होगी। देश विदेश में रासायनिक आयुध का अत्यधिक उपयोग होगा।
Hemant Bhatt